Ranjeet Bhartiya 11/09/2022

कुर्मी जाति से आने वाली लिपि सिंह बिहार कैडर की एक जांबाज़ और तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी हैं. मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले की रहने वाली लिपि सिंह अपने साहसिक पुलिस अभियानों के कारण कई बार चर्चा में आ चुकी हैं. अपराधियों के लिए खौफ का पर्याय बन चुकी लिपि सिंह “लेडी सिंघम” के […]

Ranjeet Bhartiya 10/09/2022

जाति और वर्ण पारंपरिक भारतीय समाज के वर्गीकरण हैं. इससे‌ भारत में सामाजिक पदानुक्रम निर्धारित होते हैं. जाति व्यवस्था की अवधारणा बहुत प्राचीन है. हालाँकि, समय के साथ इस व्यवस्था में बहुत सारे बदलाव हुए हैं, लेकिन यह आज भी प्रचलित है और सामाजिक जीवन पर इसका व्यापक प्रभाव है. जाति और वर्ण दो वर्गीकरण […]

Sarvan Kumar 09/09/2022

मद्धेशिया (Madheshiya/Madhesiya) भारत में पाया जाने वाला एक समुदाय है. इन्हें मद्धेशिया वैश्य, मधेशिया बनिया, मध्यदेशीय वैश्य और मद्धेशिया कांदू समुदाय के नाम से भी जाना जाता है. इनका पारंपरिक व्यवसाय मिठाई बनाना और बेचना, व्यापार तथा मुख्य रसोईया (शेफ) के रूप में काम करना रहा है. इनमें से कुछ कृषि भी करते हैं. इस […]

Ranjeet Bhartiya 08/09/2022

कहावतें या लोकोक्तियां विश्व की हर भाषा में पाईं जाती हैं. इनके प्रयोग से भाषा में संजीवता और स्फूर्ति आती है, इसीलिए इन्हें “भाषा का श्रृंगार” कहा जाता है. कहावतों और लोकोक्तियों का रूढ़ अर्थ होता है. कहावतें प्रायः सांकेतिक रूप में होती हैं‌ और बेहद कम शब्दों में जीवन के दीर्घकाल के अनुभव को […]

Ranjeet Bhartiya 07/09/2022

हिन्दू वर्ण व्यवस्था के अनुसार भारतीय समाज को कार्यात्मक रूप से चार वर्णों में विभाजित किया गया है-ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र. वर्ण व्यवस्था के पदानुक्रम में वैश्यों (बनिया) को तीसरे स्थान पर रखा गया है और इनके व्यवसाय में मुख्य रूप से कृषि, मवेशियों की देखभाल, व्यापार और अन्य व्यवसाय शामिल हैं. वैश्य वर्ण […]