Ranjeet Bhartiya 13/11/2022
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Last Updated on 04/10/2023 by Sarvan Kumar

बिहार का प्राचीन इतिहास मानव सभ्यता की शुरुआत तक फैला हुआ है. प्राचीन काल से ही बिहार की राजनीतिक और सांस्कृतिक शक्ति के केंद्र के रूप में प्रतिष्ठा रही है. बिहार में कई समुदायों और जातियों के लोग निवास करते हैं, जिन्हें बिहारी कहा जाता है. बिहार में अगड़ी, पिछड़ी और दलित जातियों की कई जातियां निवास करती हैं. इनमें से कुछ की संख्या ज्यादा है तो कुछ की कम. आइए जानते हैं बिहार में भूमिहार कितने प्रतिशत हैं?

बिहार में भूमिहार कितने प्रतिशत हैं?

बिहार में ओबीसी जाति समूहों की संख्या सबसे अधिक है जो बिहार की कुल जनसंख्या का 47-48% है. राज्य में दलितों की आबादी लगभग 16% है. बिहार में अगड़ी जातियों की भी उल्लेखनीय आबादी है. अगड़ी जाति भारत में उन जातियों को दर्शाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है, जिन्हें आर्थिक और शैक्षणिक रूप से अन्य जातियों से औसत रूप से आगे माना जाता है. उन्हें आम तौर पर सामाजिक और राजनीतिक रूप से बहुत शक्तिशाली और प्रभावशाली माना जाता है. बिहार की महत्वपूर्ण अगड़ी जातियाँ ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ और भूमिहार हैं; जो राज्य की जनसंख्या का लगभग 22% है. भूमिहारों की उत्पत्ति और इतिहास के बारे में अनेक बातें कही जाती हैं लेकिन समुदाय के लोग खुद को ब्राह्मण समुदाय का विस्तार मानते हैं. भूमिहार मूल रूप से ब्राह्मण हैं जिन्होंने दान लेना, पूजा-पाठ और कर्मकांड कराना बंद कर दिया था और जीवन यापन के लिए कृषि को अपना लिया‌ था. भूमिहार एक कृषक, जमींदार और योद्धा जाति के रूप में जाने जाते हैं. बिहार में भूमिहारों का प्रभाव उनकी संख्यात्मक शक्ति के परिमाण के अनुपात में कहीं अधिक है. आप उनके राजनीतिक प्रभाव को इस बात से समझ सकते हैं कि बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह भूमिहार जाति के थे. आजादी के बाद से बिहार की राजनीति में इस समुदाय का अच्छा प्रतिनिधित्व रहा है. बिहार में भूमिहार का ख्याति एक दबंग और जांबाज़ जाति के रूप में है. वामपंथी उग्रवादियों, नक्सली समूहों और माओवादियों का मुकाबला करने के लिए भूमिहार जमींदारों ने रणवीर सेना नामक एक निजी मिलिशिया का गठन किया था. बिहार के कई जिलों में भूमिहारों की उल्लेखनीय आबादी है. 1930 की जनगणना के अनुसार, अविभाजित बिहार में भूमिहारों में कुल जनसंख्या का लगभग 4% थी. 1931 के बाद कोई जातिगत जनगणना नहीं हुई है. बिहार में भूमिहार जाति के जनसंख्या के बारे में निम्नलिखित दावे किए जाते हैं-

•”The Print” में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में भूमिहारों को उच्च जातियों में गिना जाता है, जो कथित तौर पर राज्य की आबादी का 11 से 12 प्रतिशत हैं.

•”नवभारत टाइम्स” के मुताबिक, बिहार में भूमिहार करीब 6% आबादी हैं.

•”बीबीसी” के मुताबिक, बिहार में भूमिहार क़रीब पाँच प्रतिशत हैं.


महत्वपूर्ण सूचना: बिहार में 2022 में जाति आधारित गणना की गई. Bihar Caste Census Report 2023 के अनुसार भूमिहार जाति की जनसंख्या  3750886 ( 2.8693 %)है .राज्य की कुल आबादी 13 करोड़ से ज्यादा है, वास्तविक संख्या 13 करोड़, 07 लाख, 25 हजार 310 है.


References:

•https://m.economictimes.com/these-days-their-poster-boys-are-goons/articleshow/562507.cms

•https://theprint.in/politics/from-bochaha-bypoll-to-parshuram-jayanti-bjp-has-a-big-bhumihar-problem-in-bihar/950649/?amp

•https://navbharattimes.indiatimes.cm/state/bihar/patna/bmy-caste-equation-being-made-in-bihar-understand-in-detail-what-will-be-its-impact-on-the-politics-of-bihar/articleshow/90892274.cms

•https://www.bbc.com/hindi/india/2014/04/140422_bihar_bjp_voters_analysis_ajit_sahi_rd

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