Ranjeet Bhartiya 28/12/2022
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Last Updated on 28/12/2022 by Sarvan Kumar

भारत का हिंदू समाज हजारों जातियों में विभाजित है. प्रत्येक जाति की अपने इतिहास और उत्पत्ति की एक अनूठी कहानी है. इसलिए जातियों के इतिहास और उत्पत्ति को जानना न केवल इतिहासकारों और समाजशास्त्रियों के लिए बल्कि आम लोगों के लिए भी एक बहुत ही रोचक विषय रहा है. हिंदू जातियों की उत्पत्ति के बारे में कई पौराणिक कथाएं हैं जो उन्हें किसी न किसी महापुरुष से जोड़ती हैं. आइए इसी क्रम में जानते हैं भागीरथ सैनी के बारे में.

भागीरथ सैनी

प्राचीन जाति व्यवस्था अभी भी भारत में विशेष रूप से हिंदुओं के बीच सामाजिक संरचना का आधार बनाती है. हालांकि आमतौर पर इसे प्रमुखता से नहीं दिखाया जाता लेकिन मुसलमानों में भी जातियां मौजूद हैं. हिंदुओं की बात करें तो भारत में जाति व्यवस्था की उत्पत्ति के संबंध में अलग-अलग सिद्धांत हैं. हिंदू धर्म में, धार्मिक सिद्धांत का दावा है कि वर्णों का निर्माण सृष्टि के निर्माता ब्रह्मा के शरीर से हुआ था. बाद में समय के साथ विभिन्न कारकों के प्रभाव में, वर्ण छोटी इकाइयों में विभाजित हो गया, जिसे आज हम बड़ी संख्या में जातियों के रूप में देखते हैं. पौराणिक कथाओं में जातियों की उत्पत्ति के बारे में रोचक विवरण मिलता है. उदाहरण के लिए ब्राह्मण खुद को परशुराम से जोड़ते हैं. राजपूत, कुर्मी, कुशवाहा आदि जातियां स्वयं को श्रीराम का वंशज होने का दावा करती हैं. वहीं यादव समुदाय के लोग खुद को श्रीकृष्ण का वंशज बताते हैं. सैनी समाज की उत्पत्ति को लेकर भी कई कथाएं प्रचलित हैं. इनमें से कुछ ब्राह्मण वंश का दावा करते हैं जबकि अन्य दावा करते हैं कि वे राजपूत थे. इनमें से कई पंजाब के राजा शूरसेन के वंशज होने का दावा करते हैं. जबकि कई भगवान राम के सबसे छोटे भाई शत्रुघ्न से अपने वंश का दावा करते हैं. साथ ही इस समुदाय के लोग यह भी दावा है कि वे राजा भागीरथ से संबंधित हैं. आइए जानते हैं राजा भगीरथ कौन थे.

राजा भगीरथ कौन थे?

भागीरथ इक्ष्वाकु वंश के एक प्रसिद्ध राजा थे. इसी प्रसिद्ध सूर्यवंश में भगवान श्री राम का जन्म हुआ था. राजा भागीरथ ने पवित्र गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए हजारों वर्षों तक तपस्या की थी, तब कहीं मोक्षदायिनी मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था. गंगा को धरती पर लाने का श्रेय भागीरथ को जाता है, इसलिए उनके के नाम पर गंगा नदी को ‘भागीरथी’ कहा जाता है. गंगावतरण की इस घटना का उल्लेख कई हिंदू ग्रंथों जैसे वायुपुराण, विष्णुपुराण, हरवंश पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण, महाभारत, भागवत, वाल्मीकि रामायण आदि में किया गया है. सैनी समुदाय के लोग हर साल महाराज भागीरथ की जयंती को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं.


References:

•Rajasthan, Part 2, 1998

•https://www.jagran.com/uttar-pradesh/saharanpur-saini-committee-celebrated-the-birth-anniversary-of-maharaja-bhagirath-22732419.html

•https://www.livehindustan.com/astrology/story-ganga-dussehra-2022-katha-in-hindi-why-king-bhagirath-called-ganga-river-on-earth-6582569.html

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