Sarvan Kumar

Sarvan Kumar 17/10/2021

तेली भारत, पाकिस्तान और नेपाल में पाई जाने वाली एक जाति या समुदाय है. इन्हें तेली, तेलीकर और तैल्याकर आदि के रूप में संदर्भित किया जाता है. खाद्य तेल निकालना और बेचना इनका पारंपरिक काम रहा है. हालांकि आधुनिक समय में यह अपने पारंपरिक काम को छोड़कर अन्य कृषि तथा नौकरी-व्यवसाय भी अपनाने लगे हैं. […]

Sarvan Kumar 15/10/2021

‘बनारस’ नाम सुनते ही मां गंगा के किनारे घाटों का कई चित्र दिमाग में उभर आता है। जैसे बनारस को घाटों की बिना कल्पना नहीं की जा सकती, वैसे ही घाटों के किनारे बंधी नाव के बिना  घाटों का कल्पना नहीं कर सकते हैं। इन नावों से ही लोगों को एक तट से  दूसरे तट […]

Sarvan Kumar 10/10/2021

मुसहर मजबूत शारीरिक बनावट के होते हैं. स्वभाव से यह इमानदार, मेहनती, निष्कपट और सहनशील होते हैं. बिहार के मुसहर कार्यकर्ता अमर कुमार मांझी का दावा है कि मुसहर चूहा पकड़ते हैं, यह सभी जानते हैं. दक्षिणी बिहार से उतरी बिहार की ओर पलायन करने वाले मुसहरों का इतिहास रहा है कि वह गंगा में […]

Sarvan Kumar 10/10/2021

ज्यादातर मुसहर भूमिहीन खेतिहर मजदूर हैं. अभाव और गरीबी के कारण इन्हें आज भी कभी-कभी जीवन यापन/जीवित रहने के लिए चूहे पकड़ने का सहारा लेना पड़ता है. यह भारत में सबसे अधिक हाशिए पर रहने वाली जातियों में से एक है. इन्हें दलितों में भी दलित ‘महादलित’ श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है. आजादी के […]

Sarvan Kumar 07/10/2021

कल्पना कीजिए की नमक की खोज नही हुई होती तो क्या होता। नमक ना सिर्फ आपके खाने का स्वाद बढ़ाता है बल्कि वह आपकी जिंदगी में खुशियों को घोलने की शक्ति रखता है।आपको स्वस्थ रखने , आपकी उन्नति और समृद्धि में नमक काफी सहायक होता है। काले नमक का टुकड़ा और पीपल के पेड़ की […]

Sarvan Kumar 30/09/2021

वेदों के अनुसार प्राचीन समाज चार वर्णॉ में बंटी हुई थी। उनके नाम थे ब्राह्मण (Brahamin) , क्षत्रिय (Kshatriya) , वैश्य (Vaishya) और शूद्र (Shudra)। तीन वेद ( ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद) चारो वर्णॉ के संबंधित कर्तव्यों का निर्धारण करते हैं।  इन चार वर्णॉ में ब्राह्मण का कर्त्तव्य अध्ययन, अध्यापन, यज्ञ करना और करवाना , दान […]

Sarvan Kumar 29/09/2021

ये ब्राह्मण ही थे जिन्होंने हमारी संस्कृति, पांडुलिपियों को बचाया। उन्होंने कभी भी इस्लामवादियों की तरह व्यवहार नहीं किया, फिर भी उन्हें दोष देना है। प्राचीन जमाने में क्षत्रियों को शास्त्र , अस्त्र- शस्त्र की शिक्षा देने का दायित्व ब्राह्मणों पर ही था। राजा के मुख्य सलाहकार ब्राह्मण ही थे जो उन्हें न्याय कूटनीति, धर्म […]

Sarvan Kumar 28/09/2021

जिस ब्राह्मण के  शास्त्रों में निर्दिष्ट गर्भाधान,  पुंसवन आदि 48 संस्कार विधि पूर्वक हुए हो वही ब्राह्मण ब्रह्मलोक और ब्राह्मणत्व को प्राप्त करता है। संस्कार ही ब्राह्मणत्व प्राप्ति का मुख्य कारण है। आइए जानते हैं असली ब्राह्मण कौन है? 40 संस्कारो के नाम 1. गर्भाधान 2. पुंसवन 3. सीमन्तोन्नयन 4. जातकर्म 5. नामकरण 6. अन्नप्राशन 7. चौल 8. उपनयन, 9-12. चार वेदव्रत, 13. स्नान, 14. सहधर्मचारिणी संयोग, 15-19. पंचमहायज्ञ, 20-26. अष्टक, पार्वण श्राद्ध, श्रावणी आग्रहायणी, चैत्री, आश्रयुजी, 27-33. अग्न्याधेय, अग्निहोत्र, दर्शपौर्णमास्य, चातुर्मास्य, […]

Sarvan Kumar 28/09/2021

डॉ. रामेश्वर दत्त शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक ‘‘ब्राह्मण समाज परिचय एवं योगदान’’ के मुखपृष्ठ पर अंकित ब्रह्मरूपी वृक्ष में 14 शाखाएं हैं और इन चौदह शाखाओं में अलग-अलग ब्राह्मणों का वर्णन किया गया है। इस प्रकार ब्राह्मणों के कुछ 54 भेद हुए। जब ब्राह्मण एक जाति बन गई तो उनकी पहचान के लिए उनके वेद, […]

Sarvan Kumar 28/09/2021

ब्राह्मण ( Brahamin) जाति काफी विकसित और बुद्धिमान मानी जाती है। समाज में इन्हे उच्च जाति का दर्जा प्राप्त है।  ब्राह्मण  जाति का इतिहास  काफी गौरवशाली है। लोग अपने आपको ब्राह्मण कहने पर फख्र महसूस करते हैं। अब सवाल उठता है कि क्या कोई भी ब्राह्मण( Brahaman) बन सकता है या ये  जन्म के आधार […]

Sarvan Kumar 15/09/2021

माली हिंदुओं में पाई जाने वाली एक व्यवसायिक जाति है. यह पारंपरिक रूप से बागवानी, फूल उगाने तथा कृषि का कार्य करते हैं. माली शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द “माला” से हुई है. फूल उगाने के अपने व्यवसाय के कारण इन्हें “फूलमाली” भी कहा जाता है. माली जाति के गौरवशाली इतिहास को इस बात […]

Sarvan Kumar 09/09/2021

वैश्य हिंदू वर्ण व्यवस्था के चार वर्णों में से एक है। वैश्य हिन्दू जाति व्यवस्था के अंतर्गत वर्णाश्रम का तृतीय एवं महत्त्वपूर्ण स्तंभ है। वैश्य वर्ण में कई जाति या उप-जातियाँ होतीहैं, जिनमे विशेष रूप से अग्रहरि, अग्रवाल, बार्नवाल, गहौइस, कसौधन, महेश्वरी, खांडेलवाल, महावार, लोहानस, ओसवाल, रौनियार, आर्य वैश्य आदि है। अग्रेयवंशी क्षत्रिय ही वर्तमान […]

Sarvan Kumar 05/09/2021

किसान यानि अन्नदाता, इंसान कितना भी पैसा कमा ले पर वह भोजन बिना तो नहीं रह सकता।  पूरी दुनिया का पेट भरने वाला किसान ही तो है । हम कह सकते हैं की किसान बिना यह दुनिया तो चल ही नहीं सकता। कुर्मी (Kurmi)  जाति देश की कृषक जाति की प्रतिनिधि है। ज्यादातर कुर्मी उत्तरी भारत […]

Sarvan Kumar 04/09/2021

Current  Affairs  04 September 2021 1. विश्व नारियल दिवस (World Coconut Day) कब मनाया जाता है? A. 1 सितंबर B. 2 सितंबर C. 3 सितंबर D. 4 सितंबर सही उत्तर: B. 2 सितंबर नारियल के उपयोग के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विश्व नारियल दिवस हर साल 2 सितंबर को मनाया जाता है. […]

Sarvan Kumar 04/09/2021

हिन्दू नववर्ष भारतीयों का असली नया साल है,अंग्रेजी कैलेंडर के प्रचलन के बावजूद भारतीयों के जिंदगी से हिंदू कैलेंडर पूरी तरह निकल नही पाया है क्योंकि सारे पावन त्यौहार हिंदी कैलेंडर से तैयार तिथि के अनुसार ही मनाया जाता है. हिंदू शादी विवाह हिंदू पंचांग के अनुसार ही करते हैं. आइए जानते  हैं हिंदू नववर्ष […]