Religion

Sarvan Kumar 23/10/2021

धानुक भारत, बांग्लादेश और नेपाल में पाया जाने वाला एक जातीय समूह है. विभिन्न क्षेत्रों में यह जाति अलग-अलग नामों से जानी जाती है‌ जैसे धानुक, धानुका, धनिक, धेनिक, धानका, धानकिया, धनूर आदि. लेकिन इन सब नामों में इस जाति का मूल नाम धानुक और धानक ही है. हरियाणा में यह डेलू के नाम से […]

Sarvan Kumar 17/10/2021

तेली भारत, पाकिस्तान और नेपाल में पाई जाने वाली एक जाति या समुदाय है. इन्हें तेली, तेलीकर और तैल्याकर आदि के रूप में संदर्भित किया जाता है. खाद्य तेल निकालना और बेचना इनका पारंपरिक काम रहा है. हालांकि आधुनिक समय में यह अपने पारंपरिक काम को छोड़कर अन्य कृषि तथा नौकरी-व्यवसाय भी अपनाने लगे हैं. […]

Ranjeet Bhartiya 17/10/2021

तेली समाज का इतिहास स्वर्णिम और गौरवशाली रहा है. स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्र के उत्थान और देश के सामाजिक राजनीतिक और आर्थिक कार्यों में इस समाज का अहम योगदान रहा है. यह समाज अपने सेवा भाव, त्याग, देश प्रेम, धर्म और संस्कृति की रक्षा और अपने दानवीरता के लिए जाना जाता है. जब- जब इस देश […]

Sarvan Kumar 15/10/2021

‘बनारस’ नाम सुनते ही मां गंगा के किनारे घाटों का कई चित्र दिमाग में उभर आता है। जैसे बनारस को घाटों की बिना कल्पना नहीं की जा सकती, वैसे ही घाटों के किनारे बंधी नाव के बिना  घाटों का कल्पना नहीं कर सकते हैं। इन नावों से ही लोगों को एक तट से  दूसरे तट […]

Sarvan Kumar 10/10/2021

मुसहर मजबूत शारीरिक बनावट के होते हैं. स्वभाव से यह इमानदार, मेहनती, निष्कपट और सहनशील होते हैं. बिहार के मुसहर कार्यकर्ता अमर कुमार मांझी का दावा है कि मुसहर चूहा पकड़ते हैं, यह सभी जानते हैं. दक्षिणी बिहार से उतरी बिहार की ओर पलायन करने वाले मुसहरों का इतिहास रहा है कि वह गंगा में […]

Sarvan Kumar 10/10/2021

ज्यादातर मुसहर भूमिहीन खेतिहर मजदूर हैं. अभाव और गरीबी के कारण इन्हें आज भी कभी-कभी जीवन यापन/जीवित रहने के लिए चूहे पकड़ने का सहारा लेना पड़ता है. यह भारत में सबसे अधिक हाशिए पर रहने वाली जातियों में से एक है. इन्हें दलितों में भी दलित ‘महादलित’ श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है. आजादी के […]

Sarvan Kumar 07/10/2021

कल्पना कीजिए की नमक की खोज नही हुई होती तो क्या होता। नमक ना सिर्फ आपके खाने का स्वाद बढ़ाता है बल्कि वह आपकी जिंदगी में खुशियों को घोलने की शक्ति रखता है।आपको स्वस्थ रखने , आपकी उन्नति और समृद्धि में नमक काफी सहायक होता है। काले नमक का टुकड़ा और पीपल के पेड़ की […]

Ranjeet Bhartiya 07/10/2021

कहार भारत में पाई जाने वाली एक हिंदू जाति है. इनका इतिहास प्राचीन और गौरवशाली है. यह खुद को कश्यप ऋषि और सप्तऋषियों का वंशज होने का दावा करते हैं. कश्यप ऋषि मरीचि के पुत्र थे. ऐसी मान्यता है कि मरीचि से ही सारे देवताओं और असुरों की उत्पत्ति हुई है. कहार एक बहादुर और […]

Ranjeet Bhartiya 03/10/2021

सुनार भारत और नेपाल में पाया जाने वाला एक हिंदू जाति है.इस वीर और महान जाति का इतिहास स्वर्णिम और गौरवशाली रहा है. यह भारत की मूल निवासी जाति है. यह सुंदर, चरित्रवान और साहसी होते हैं. इन्हें सोनार या स्वर्णकार भी कहा जाता है. मूलतः यह क्षत्रिय वर्ण में आते हैं, इसीलिए इन्हें क्षत्रिय […]

Ranjeet Bhartiya 02/10/2021

कुम्हार भारत, पाकिस्तान और नेपाल में पाया जाने वाला एक जाति या समुदाय है. इनका इतिहास अति प्राचीन और गौरवशाली है. मानव सभ्यता के विकास में कुम्हारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. कहा जाता है कि कला का जन्म कुम्हार के घर में ही हुआ है. इन्हें उच्च कोटि का शिल्पकार वर्ग माना गया है. […]

Ranjeet Bhartiya 02/10/2021

भाषा, क्षेत्र और सांस्कृतिक विविधताओं के आधार पर इस जाति में कई उप समूह या उपजातियां पाई जाती  हैं. जैसे मालवा के मालवी, हैदराबाद और तेलुगु क्षेत्र के तेलंगा, उत्तर भारत के परदेसी और मराठा क्षेत्र के मराठा. गढेवाल या गढे जो टाइल्स बनाते हैं और उन्हें गधों पर ढोते हैं, बर्दिया जो परिवहन के […]

Sarvan Kumar 30/09/2021

वेदों के अनुसार प्राचीन समाज चार वर्णॉ में बंटी हुई थी। उनके नाम थे ब्राह्मण (Brahamin) , क्षत्रिय (Kshatriya) , वैश्य (Vaishya) और शूद्र (Shudra)। तीन वेद ( ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद) चारो वर्णॉ के संबंधित कर्तव्यों का निर्धारण करते हैं।  इन चार वर्णॉ में ब्राह्मण का कर्त्तव्य अध्ययन, अध्यापन, यज्ञ करना और करवाना , दान […]

Sarvan Kumar 29/09/2021

ये ब्राह्मण ही थे जिन्होंने हमारी संस्कृति, पांडुलिपियों को बचाया। उन्होंने कभी भी इस्लामवादियों की तरह व्यवहार नहीं किया, फिर भी उन्हें दोष देना है। प्राचीन जमाने में क्षत्रियों को शास्त्र , अस्त्र- शस्त्र की शिक्षा देने का दायित्व ब्राह्मणों पर ही था। राजा के मुख्य सलाहकार ब्राह्मण ही थे जो उन्हें न्याय कूटनीति, धर्म […]

Sarvan Kumar 28/09/2021

जिस ब्राह्मण के  शास्त्रों में निर्दिष्ट गर्भाधान,  पुंसवन आदि 48 संस्कार विधि पूर्वक हुए हो वही ब्राह्मण ब्रह्मलोक और ब्राह्मणत्व को प्राप्त करता है। संस्कार ही ब्राह्मणत्व प्राप्ति का मुख्य कारण है। आइए जानते हैं असली ब्राह्मण कौन है? 40 संस्कारो के नाम 1. गर्भाधान 2. पुंसवन 3. सीमन्तोन्नयन 4. जातकर्म 5. नामकरण 6. अन्नप्राशन 7. चौल 8. उपनयन, 9-12. चार वेदव्रत, 13. स्नान, 14. सहधर्मचारिणी संयोग, 15-19. पंचमहायज्ञ, 20-26. अष्टक, पार्वण श्राद्ध, श्रावणी आग्रहायणी, चैत्री, आश्रयुजी, 27-33. अग्न्याधेय, अग्निहोत्र, दर्शपौर्णमास्य, चातुर्मास्य, […]

Sarvan Kumar 28/09/2021

डॉ. रामेश्वर दत्त शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक ‘‘ब्राह्मण समाज परिचय एवं योगदान’’ के मुखपृष्ठ पर अंकित ब्रह्मरूपी वृक्ष में 14 शाखाएं हैं और इन चौदह शाखाओं में अलग-अलग ब्राह्मणों का वर्णन किया गया है। इस प्रकार ब्राह्मणों के कुछ 54 भेद हुए। जब ब्राह्मण एक जाति बन गई तो उनकी पहचान के लिए उनके वेद, […]