Religion

Sarvan Kumar 22/11/2021

भूमिहार शब्द के शाब्दिक अर्थ से इनके उत्पत्ति के  बारे में अनुमान लगाए जाते रहे हैं। भूमिहार दो शब्दों के मेल से बना हुआ है एक है भूमि और दूसरा हार ,अर्थात भूमि + हार = भूमिहार। भूमि का अर्थ तो सबको पता है भूमि का मतलब है जमीन, हार का अलग-अलग अर्थ निकाले जाते […]

Ranjeet Bhartiya 21/11/2021

कोरवा (Korwa) मुख्य रूप से भारत के छत्तीसगढ़ राज्य में पाई जाने वाली एक प्राचीन जनजाति है. अधिकांश कोरवा अन्य समुदायों से अलग-थलग पहाड़ी और जंगली दुर्गम इलाकों में निवास करते हैं. ज्यादातर कोरवा आज भी शिकारी हैं और जंगली उत्पादों, खाद्य पदार्थों, जड़ी-बूटी और कंदमूल को इकट्ठा करने का काम करते हैं. बहुत कम […]

Ranjeet Bhartiya 21/11/2021

 चेरो (Chero) भारत में निवास करने वाली एक जाति है. अलग-अलग क्षेत्रों में इन्हें भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता है. पलामू में इन्हें बाराहजारी, दक्षिणी छोटानागपुर में पच्चासी, तो बिहार में इन्हें चारवा या चूरू के नाम से जाना जाता है. झारखंड में निवास करने वाले चेरो मुख्य रूप से किसान हैं, इनमें से कई […]

Ranjeet Bhartiya 21/11/2021

गोंड, भारत का सबसे बड़ा आदिवासी समुदाय है. ये संभवतः द्रविड़ मूल के हैं और आर्यन युग के पहले से भारत में रहते आए हैं. गोंड ( Gond) शब्द कोंड     (Kond)  से आया है जिसका अर्थ है हरे पहाड़. गोंड स्वयं को कोईतुर (Koitur कहते हैं लेकिन अन्य लोग उन्हें गोंड कहते हैं क्योंकि […]

Ranjeet Bhartiya 21/11/2021

बैगा (Baiga) भारत में पाई जाने वाली एक आदिवासी जनजाति (Primitive Tribe) है. यह जनजाति भारत के सबसे प्राचीनतम आदिवासी समूहों में से एक है.यह घने जंगलों, पहाड़ी इलाकों और दुर्गम स्थानों पर निवास करने वाली जनजाति है. जीवन यापन के लिए यह मुख्य रूप से कृषि और वन संसाधनों पर निर्भर हैं. बैगा जनजाति […]

Ranjeet Bhartiya 19/11/2021

हलबा या हल्बी (Halba or Halbi) भारत में निवास करने वाला एक आदिवासी जातीय समुदाय है. यह छत्तीसगढ़ में बहुतायत में पाए जाने वाली एक जनजाति है. यह जनजाति समूह 17वीं शताब्दी में बस्तर राज्य के प्रमुख और सबसे प्रभावशाली जनजातीय समूहों में से एक थी, और राजनीति और सेना में सक्रिय थी. इस जनजाति […]

Ranjeet Bhartiya 19/11/2021

हलवाई भारत, पाकिस्तान और नेपाल में पाई जाने वाली एक व्यवसायिक जाति है. नेपाल में इन्हें हलुवाई कहा जाता है. मिष्ठान बनाने वाले को हलवाई कहा जाता है. यह पाक कला में प्रवीण होते हैं. मिठाई और स्वादिष्ट पकवान बनाना और बेचना इनका पारंपरिक व्यवसाय है. यह एक प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण जाति […]

Ranjeet Bhartiya 18/11/2021

मल, मल्ल या मल्ला (Mal or Malla) भारत और बांग्लादेश में पाया जाने वाला एक जातीय समुदाय है.भारत में यह मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल और झारखंड में पाए जाते हैं. थोड़े-बहुत संख्या में यह बिहार और असम में भी निवास करते हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार, पश्चिम बंगाल में इनकी आबादी 3,06,234 थी. […]

Ranjeet Bhartiya 18/11/2021

कोली (Koli) भारत में पाया जाने वाला एक जातीय समूह है. गुजरात में यह एक जमींदार जाति है, जिनका प्रमुख कार्य कृषि है. पढ़े-लिखे कोली सरकारी और प्राइवेट क्षेत्र में नौकरियां करते हैं. महाराष्ट्र में इन्हें एक पुराना क्षत्रिय जाति माना जाता है. यह जाति अपनी बहादुरी और निडरता के लिए जाने जाती है. यह […]

Ranjeet Bhartiya 17/11/2021

मीना या मीणा (Meena or Mina) भारत में पाई जाने वाली एक आदिवासी जाति है. इन्हें भारत के प्राचीनतम जातियों में से माना जाता है. इस जाति की गिनती भारत के वीर क्षत्रिय योद्धा जातियों में की जाती है. जीवन यापन के लिए यह मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन पर निर्भर हैं. हालांकि अब […]

Ranjeet Bhartiya 12/11/2021

सहरिया (Saharia, Sahariya, Sehariya, or Sahar) भारत में पाई जाने वाली एक जाति है. इन्हें रावत, बनरावत, बनरखा और सोरेन के नाम से भी जाना जाता है. यह मुख्य रूप से उत्तर भारत के बुंदेलखंड क्षेत्र में निवास करते हैं. जीवन यापन के लिए यह मुख्य रूप से वनों पर निर्भर हैं. यह विशेषज्ञ लकड़हारे […]

Sarvan Kumar 11/11/2021

निषाद समाज  ऐसे जातियों के समूह को कहते हैं जो नाव चलाने तथा मछली मारने का काम करते हैं। इस समूह के अन्तर्गत कई जातियाँ हैं जैसे निषाद, बिंद, मल्लाह, केवट, कश्यप, भर, धीवर, बाथम, मछुआरा, कहार, धीमर, मांझी और तुरहा। देश की अधिकतर जातियां अपने पुश्तैनी कामों को छोड़ चुकी है, पर जाति व्यवस्था […]

Ranjeet Bhartiya 11/11/2021

कोल भारत में पाई जाने वाली एक जनजाति है. अधिकांश कोल भूमिहीन हैं जो जंगलों में अपना जीवन यापन करते हैं. यह जीविका चलाने के लिए मुख्य रूप से वन उत्पाद और जंगल के संसाधनों पर निर्भर हैं. यह जंगल काट कर लकड़ियों को स्थानीय बाजार और शहरों में पहुंचाने का काम करते थे, जहां […]

Ranjeet Bhartiya 09/11/2021

मोची दक्षिण एशिया में पाया जाने वाला एक व्यवसायिक जाति समुदाय है. चमड़े के जूते बनाना इनका पारंपरिक कार्य रहा है. ऐतिहासिक रूप से यह समुदाय चमड़े के सुरक्षात्मक शिल्प के निर्माण में शामिल था. सैनिकों के लिए सुरक्षात्मक चमड़े के कपड़े निर्माण में शामिल होने के कारण यह समुदाय सेना के साथ निकटता से […]