Ranjeet Bhartiya 26/11/2022

स्वतंत्र लेखक प्रसन्न चौधरी और पत्रकार श्रीकांत की किताब ‘बिहार सामाजिक परिवर्तन के कुछ आयाम’ में इस घटना का विस्तार से जिक्र है। साल था 1925। बिहार में निचली समझी जाने वाली जातियां एक जगह जुटती थीं और सभी एक साथ जनेऊ धारण करते थे। इसे बिहार में ऊंची समझी जाने वाली जातियों ने खुद […]

Ranjeet Bhartiya 25/11/2022

भारत में जाति आधारित हिंसा का पुराना इतिहास रहा है. जातिगत हिंसा ज्यादातर बिहार, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा और बंगाल के ग्रामीण इलाकों में हुई है. तमिलनाडु, राजस्थान, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में कुछ राजनीतिक रूप से प्रेरित जाति संघर्ष देखे गए हैं. जातिगत हिंसा के कई सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक कारण रहे हैं. अंतर्जातीय हिंसा के […]

Ranjeet Bhartiya 24/11/2022

वैसे तो दबंग शब्द के कई अर्थ हैं लेकिन इसका मूल अर्थ होता है-प्रभावशाली. आम तौर पर, जाति जो परंपरागत रूप से जाति पदानुक्रम में उच्च होती है, समाज में प्रभुत्व की स्थिति रखती है. भारतीय संदर्भ में, ब्राह्मणों और राजपूतों का पारंपरिक रूप से वर्चस्व रहा है. सांस्कृतिक पहचान देने में धर्म एक व्यक्ति […]

Ranjeet Bhartiya 23/11/2022

अंग्रेजों ने लड़ाकू जातियों या योद्धा जातियों (Martial Races) की तत्कालीन अवधारणा के आधार पर ब्रिटिश भारतीय सेना में कई रेजिमेंटों का गठन किया था. इनमें से कई जाति-आधारित रेजिमेंटों को भंग कर दिया गया, जबकि कुछ जाति-आधारित रेजिमेंट अभी भी अस्तित्व में हैं. आइए इसी क्रम में जानते हैं भूमिहार रेजिमेंट के बारे में. […]

Ranjeet Bhartiya 22/11/2022

भारत की राजनीति में सवर्णों का दबदबा रहा है. सवर्ण जातियों में भूमिहार बिहार और पूर्वांचल की राजनीति में बहुत प्रभावशाली रहे हैं. बिहार, उत्तर प्रदेश में सरकार भले ही किसी भी पार्टी की रही हो, लेकिन भूमिहार नेताओं की हमेशा तवज्जो मिलती रही है. आइए इसी क्रम में जानते हैं भूमिहार नेताओं के बारे […]

Ranjeet Bhartiya 21/11/2022

भारतीय राजनीति में क्षेत्रवाद, जातीयता और जाति जैसे मुद्दे हमेशा महत्वपूर्ण रहें है. आजादी से लेकर अब तक के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पाएंगे कि ज्यादातर राज्यों में ऊंची जातियों के लोग ही मुख्यमंत्री रहे हैं. आइए इसी क्रम में जानते हैं भूमिहार जाति के मुख्यमंत्री के बारे में. भूमिहार जाति के मुख्यमंत्री जाति […]

Ranjeet Bhartiya 20/11/2022

भूमिहार भारत में रहने वाली एक ऐसी सवर्ण जाति है जो अपनी पराक्रम, शौर्य और बुद्धिमता के लिए प्रसिद्ध है. भारत के कई राज्यों में इनकी उपस्थिति है, लेकिन मुख्य रूप से यह समुदाय बिहार और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में केंद्रित है. बिहार के पड़ोसी राज्यों जैसे कि झारखंड और बंगाल में भी […]

Ranjeet Bhartiya 19/11/2022

भारतीय हिन्दू समाज की सामाजिक संरचना जातियों पर आधारित है. वैवाहिक संबंध की दृष्टि से वंश, कुल, गोत, खाप, गोत्र, कुरी आदि महत्वपूर्ण इकाईयाँ है. गोत्र, एक जाति के भीतर वंश खंड है जो एक सामान्य पौराणिक पूर्वज से सदस्यों के वंश के आधार पर अंतर्विवाह पर रोक लगाता है. आइए इसी क्रम में जानते हैं […]

Sarvan Kumar 18/11/2022

महाभारत प्राचीन भारत का सबसे बड़ा महाकाव्य है। ये एक धार्मिक ग्रन्थ भी है। विश्व का सबसे लंबा यह साहित्यिक  ग्रंथ और महाकाव्य, हिन्दू धर्म के मुख्यतम ग्रंथों में से एक है। इस ग्रन्थ को हिन्दू धर्म में पंचम वेद माना जाता है. महाभारत को महर्षि वेद व्यासजी ने लिखा था। महाभारत की रचना कब […]

Ranjeet Bhartiya 16/11/2022

Thumbnail Image Credit Facebook : Left (आयुष त्यागी काकड़ा ) Right ( बॉबी त्यागी) त्यागी (Tyagi), जिसे मूल रूप से ‘तगा’ (Taga) कहा जाता है, भारत में रहने वाली एक कृषक जाति है जो ब्राह्मण स्थिति का दावा करती है. यह एक ज़मींदार समुदाय रहा है और अक्सर इसे कृषक जातियों में सर्वोच्च माना जाता […]

Ranjeet Bhartiya 15/11/2022

भूमिहार पूर्वी और उत्तरी भारत में रहने वाली एक बहुत ही प्रभावशाली हिंदू जाति है. भारत के कई राज्यों में इनकी मौजूदगी है लेकिन बिहार में इनकी अच्छी खासी आबादी है. बिहार से सटे उत्तर प्रदेश राज्य के पूर्वी हिस्से, पूर्वांचल,के कई जिलों ‌में भी इनकी अच्छी आबादी है. आइए इसी क्रम में जानते हैं […]

Ranjeet Bhartiya 14/11/2022

भूमिहार (Bhumihar) उत्तर और पूर्वी भारत की एक हिंदू जाति है. इन्हें ब्राह्मण भूमिहार और बाभन (Babhan) के नाम से भी जाना जाता है. जमींदारों का एक बड़ा हिस्सा इसी जाति से आता था. इस जाति के लोग बड़ी-बड़ी रियासतों के मालिक रहे हैं. यह एक उच्च शिक्षित समुदाय है. इस समुदाय के लोग तीक्ष्ण […]

Ranjeet Bhartiya 13/11/2022

बिहार का प्राचीन इतिहास मानव सभ्यता की शुरुआत तक फैला हुआ है. प्राचीन काल से ही बिहार की राजनीतिक और सांस्कृतिक शक्ति के केंद्र के रूप में प्रतिष्ठा रही है. बिहार में कई समुदायों और जातियों के लोग निवास करते हैं, जिन्हें बिहारी कहा जाता है. बिहार में अगड़ी, पिछड़ी और दलित जातियों की कई […]

Ranjeet Bhartiya 12/11/2022

एक स्थायी नौकरशाही के रूप में, सिविल सेवा को देश की प्रशासनिक मशीनरी का रीढ़ माना जाता है. सिविल सेवा परीक्षा भारत में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय विदेश सेवा (IFS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) सहित भारत सरकार की उच्च सिविल सेवाओं में भर्ती के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित एक […]

Sarvan Kumar 11/11/2022

भारत के दलितों के लिए शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करना भारत सरकार के लिए जाति व्यवस्था के सामाजिक प्रभावों को कम करने में सबसे बड़ी चुनौती रही है, जो अभी भी भारतीय समाज में व्याप्त है. लेकिन समय के साथ दलित समुदाय के लोग भी शिक्षा के प्रति जागरूक हुए हैं और दलित समुदायों में […]