Religion

Ranjeet Bhartiya 13/03/2023

बिहार भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्थित एक महत्वपूर्ण राज्य है. इसका अतीत अत्यंत स्वर्णिम एवं गौरवशाली रहा है तथा यह विशाल साम्राज्यों, शिक्षा केन्द्रों एवं संस्कृति के गढ़ के रूप में प्रसिद्ध रहा है. बिहार के सामाजिक ताने-बाने में जातियों का विशेष महत्व है. सरकारी दस्तावेजों में दर्ज जातियों की संख्या के अनुसार राज्य में […]

Ranjeet Bhartiya 12/03/2023

नाई भारत में पायी जाने वाली एक महत्वपूर्ण जाति है जिसका पारंपरिक पेशा बाल काटना और हजामत बनाना है. भारत के सभी राज्यों में इनकी मौजूदगी है और इन्हें कई नामों से जाना जाता है. बिहार राज्य में भी इनकी महत्वपूर्ण उपस्थिति है और राज्य के सभी जिलों में यह समुदाय व्यापक रूप से वितरित […]

Ranjeet Bhartiya 11/03/2023

पंडित एक ऐसा शब्द है जिसके कई अर्थ हैं. आमतौर पर लोग इस शब्द का अर्थ पुजारी समझते हैं. शब्द-संग्रहों के अनुसार इस शब्द का अर्थ ऐसे हिन्दू व्यक्ति से है जो संस्कृत, हिन्दू दर्शन और धार्मिक विषयों का ज्ञाता हो. लेकिन इस शब्द का अर्थ यहीं तक सीमित नहीं है, इसके और भी कई […]

Ranjeet Bhartiya 09/03/2023

कायस्थ और राजपूत भारत में रहने वाली दो प्रमुख जातियाँ हैं. ये दोनों जातियां सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक रूप से काफी प्रभावशाली मानी जाती हैं. कायस्थ अपनी बुद्धिमत्ता के लिए प्रसिद्ध हैं, जबकि राजपूत अपनी वीरता के लिए प्रसिद्ध हैं. यहां हम निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से इन दोनों समुदायों के बीच समानताओं को […]

Ranjeet Bhartiya 07/03/2023

भारत में हजारों जातियां निवास करती हैं, जिन्हें संवैधानिक व्यवस्था के तहत अगड़ी जाति, पिछड़ी जाति, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के रूप में वर्गीकृत किया गया है. अगड़ी जातियों में वे जातियाँ शामिल हैं जो सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक आधार पर अन्य जातियों से आगे मानी जाती हैं. ब्राह्मण, कायस्थ और राजपूत जातियों को […]

Ranjeet Bhartiya 06/03/2023

सामाजिक संस्थाएँ नियमों और मानदंडों की मानव निर्मित संरचनाएँ हैं जो व्यक्तिगत व्यवहार को निर्धारित करती हैं. हिन्दुओं की सामाजिक व्यवस्था में गोत्र और प्रवर नामक संस्थाओं का विशेष महत्व रहा है. ये संस्थान वैदिक काल से अस्तित्व में हैं और मुख्य रूप से रूढ़िवादी ब्राह्मणों द्वारा इसका सख्ती से पालन किया जाता है. यहां […]

Sarvan Kumar 05/03/2023

कोली समाज की कुलदेवी का नाम “मुम्बा देवी” है. मुम्बा देवी के नाम से ही महाराष्ट्र के इस जिले को मुंबई नाम दिया गया है. कोली समुदाय मुंबई का अभिन्न अंग है. उन्हें मुंबई शहर का मूल निवासी माना जाता है. ‘कोली नृत्य’ महाराष्ट्र के सबसे लोकप्रिय लोक नृत्यों में से एक है. कोली लोग […]

Ranjeet Bhartiya 02/03/2023

सामाजिक व्यवस्थाएँ समाज को स्थिरता प्रदान करती हैं. वर्ण व्यवस्था सामाजिक व्यवस्था का एक रूप है जिसके तहत समाज को गुणों और कर्मों के आधार पर 4 समूहों में विभाजित किया गया है – ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र. समय के साथ चार वर्णों में विभाजित हिन्दू समाज विभिन्न कारकों के कारण 6000 से अधिक […]

Ranjeet Bhartiya 01/03/2023

जातियों की उत्पत्ति और विकास एक दिलचस्प विषय है. ऋग्वैदिक काल से ही चर्मकार, लोहार, बढ़ई और वैद्य आदि जैसी व्यवसायिक जातियों का उल्लेख मिलने लगता है. गुप्त और उत्तर-गुप्त काल में कई नई जातियों का उदय हुआ. भूमि और राजस्व संबंधित कागजातों का हिसाब-किताब रखने और उन्हें सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कायस्थ जाति […]

Ranjeet Bhartiya 28/02/2023

कायस्थ और ब्राह्मण भारत की सबसे सफल और प्रभावशाली जातियों में गिने जाते हैं. अमेरिकी इंडोलॉजिस्ट, धार्मिक अध्ययन और दक्षिण एशियाई अध्ययन के विद्वान क्रिश्चियन ली नोवेट्ज़के (Christian Lee Novetzke) के अनुसार, मध्यकालीन भारत के कुछ हिस्सों में कायस्थ को या तो ब्राह्मण या ब्राह्मणों के बराबर माना जाता था. प्राचीनता, उत्पत्ति, पारंपरिक कार्य, वर्ण […]

Ranjeet Bhartiya 26/02/2023

कायस्थ भारत में रहने वाली एक ऐसी जाति है जिसकी उत्पत्ति के बारे में बहुत सी बातें कही जाती हैं. इनकी वर्ण स्थिति को लेकर भी कई अवधारणाएं हैं. परंपरागत रूप से एक लेखक जाति के रूप में इनकी पहचान है. वर्तमान में इस जाति को हिंदुओं की एक अगड़ी जाति के रूप में स्वीकार्यता […]

Ranjeet Bhartiya 25/02/2023

भारत में 6000 से अधिक हिंदू जातियां निवास करती हैं. हिंदू धर्म ग्रंथों में वर्णित वर्ण व्यवस्था के अनुसार इन जातियों को गुण और कर्म के आधार पर चार वर्णों में बांटा गया है. इनमें से कई जातियों की वर्ण स्थिति बहुत स्पष्ट है, जबकि कई जातियाँ ऐसी भी हैं जिनकी वर्ण स्थिति एक जटिल […]

Ranjeet Bhartiya 24/02/2023

कायस्थ भारतीय उपमहाद्वीप के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक रूप से वितरित समुदाय हैं. जानकारों का मानना है कि यह एक एकल जाति के बजाय क्षेत्रीय विविधताओं वाला, एक गैर-सामंजस्यपूर्ण समूह है जो विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है. क्षेत्रीय विविधताओं और असमानताओं से भरे जाति समूह होने के कारण, इनकी वर्ण […]

Ranjeet Bhartiya 18/02/2023

मनुस्मृति को हिन्दू धर्म का प्राचीन धार्मिक ग्रंथ माना जाता है. मनुस्मृति में मनुष्यों को चार वर्णो में बांटा गया है- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र. कई विद्वानों का मत है कि मनु ने प्रत्यक्ष रूप से जाति व्यवस्था की रचना नहीं की, बल्कि जाति व्यवस्था का बीज अवश्य बोया, जिससे समय के साथ हिंदू […]

Ranjeet Bhartiya 14/02/2023

विभिन्न स्रोतों से जानकारी मिलती है कि दक्षिण पूर्व एशिया की वर्तमान मुस्लिम आबादी के मूल पूर्वज हिंदू थे. भारत में पाई जाने वाली अनेक मुस्लिम जातियों के लोग भी मूल रूप से हिन्दू थे. उदाहरण के तौर पर इदरीसी, बोहरा, रंगरेज, सिंधी मुस्लिम, पिंजारा, मुस्लिम पटेल आदि. विद्वानों और इतिहासकारों का मानना ​​है कि […]