Religion

Ranjeet Bhartiya 27/04/2023

शक्ति का महत्व अनादिकाल से रहा है. सरल अर्थ में शक्ति शब्द का तात्पर्य ताकत, बल या योग्यता से है. शक्ति हमें किसी कार्य को करने की क्षमता देती है. शक्ति से हम लोगों और व्यवस्थाओं को नियंत्रित करने की क्षमता प्राप्त करते हैं. शक्ति वह प्रभाव है जिससे समाज में प्रभुत्व स्थापित किया जाता […]

Ranjeet Bhartiya 26/04/2023

धन शब्द के कई अर्थ हैं. आमतौर पर यह शब्द पैसा या संपत्ति को संदर्भित करता है. अर्थात जिसके पास प्रचुर मात्रा में पैसा या संपत्ति है, वह धनवान है. लेकिन अगर हम गहराई से सोचें तो इस शब्द के अमूर्त पहलू भी हैं. यह शब्द न केवल मूल्यवान वस्तुओं को संदर्भित करता है, बल्कि […]

Ranjeet Bhartiya 24/04/2023

हिंदू जीवन दर्शन में एक विशेष प्रकार की सामाजिक व्यवस्था का विकास हुआ, जिसे वर्ण व्यवस्था कहा जाता है. अपने मूल रूप में, वर्ण व्यवस्था कर्म और व्यक्ति की प्रकृति पर आधारित थी. उत्तर वैदिक काल तक, समाज स्पष्ट रूप से चार वर्णों में विभाजित हो गया था- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र तथा इन […]

Pinki Bharti 21/04/2023

लोटस टेंपल दिल्ली में मौजूद प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है. यह स्थान अपनी वास्तुकला और सुंदरता के कारण दुनिया भर के पर्यटकों मैं प्रसिद्ध है. इस मंदिर का निर्माण 1986 में पूरा हुआ था. अगर आप दिल्ली में घूमने के लिए आते हैं तो आपको एक बार इस लोटस मंदिर में जरूर घूमने […]

Ranjeet Bhartiya 19/04/2023

भारत का संविधान समाज के उत्पीड़ित वर्गों के लिए सकारात्मक भेदभाव की व्यवस्था को संचालित करने की अनुमति देता है. इस व्यवस्था को आरक्षण भी कहते हैं. सकारात्मक भेदभाव एक नीतिगत पहल है जिसका उद्देश्य वंचित समूहों को शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान करके समाज की मुख्यधारा में शामिल करना है. आरक्षण व्यवस्था के […]

Ranjeet Bhartiya 17/04/2023

भारत में रहने वाली हजारों जातियों में ब्राह्मणों का अपना एक अलग स्थान है. ब्राह्मणों का अपना एक प्राचीन और गौरवशाली इतिहास रहा है. खासकर धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में इनका दबदबा रहा है. ब्राह्मण समुदाय ने भारत के सांस्कृतिक विकास में, संस्कृति की रक्षा में और आधुनिक भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाई […]

Ranjeet Bhartiya 16/04/2023

हिंदू धार्मिक शास्त्रों में वर्णित वर्ण व्यवस्था के अनुसार, समाज को चार समूहों में बांटा गया है- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र. वर्ण-व्यवस्था के तहत, प्रत्येक वर्ण के व्यवसाय और कार्य श्रम के विभाजन द्वारा निर्धारित किए गए हैं. ब्राह्मण पारंपरिक रूप से पुरोहिताई और शिक्षा से जुड़ा समुदाय है. वर्तमान में इसे वर्ण और […]

Ranjeet Bhartiya 15/04/2023

हिंदू धर्म और सनातन संस्कृति को जीवित रखने में, भारत के आध्यात्मिक ज्ञान को संरक्षित करने में, स्वतंत्रता आंदोलन में और आजादी के बाद आधुनिक भारत के निर्माण में ब्राह्मणों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. ब्राह्मण मूल रूप से हिंदू वर्ण व्यवस्था के तहत एक वर्ण है. ब्राह्मणों में कई जातियां हैं जो पूरे भारत […]

Sarvan Kumar 08/04/2023

“यादव” राजा यदु के वंशज, कि कई शाखाएं हैं. इन्हीं में से एक है वृष्णि या वृष्णि गोप नारायण, इसी कुल में आगे चल कर भगवान कृष्ण का जन्म हुआ. कृष्ण के ही वंशज कृष्णौत Krishnaut कहलाये. कृष्णौत या कृष्णावत यादव जाति की उप शाखा है, यह मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, नेपाल और पूर्वी […]

Ranjeet Bhartiya 04/04/2023

भारत विविधताओं से भरा देश है. यहां विभिन्न समुदायों के लोग रहते हैं जो विभिन्न धर्मों का पालन करते हैं, विभिन्न भाषाएं बोलते हैं और उनकी जीवन शैली और रीति-रिवाजों में भी विविधता है. भारत में हजारों जातियां रहती हैं, इसलिए भारत को जातियों का देश भी कहा जाता है. आम तौर पर एक जाति […]

Sarvan Kumar 01/04/2023

खत्री  (Khatri) मूल रूप से दक्षिण एशिया में पाई जाने वाली एक जाति है. यह मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिम-उत्तरी भाग में निवास करते हैं. खत्री समाज का इतिहास प्रभावशाली, गौरवशाली और स्वर्णिम रहा है. मध्यकाल और ब्रिटिश हुकूमत के अंत से लेकर अब तक तक इस समाज की हर क्षेत्र जैसे-व्यवसाई, दुकानदार, […]

Ranjeet Bhartiya 25/03/2023

हिंदू धर्म में कुल देवी-देवताओं का विशेष महत्व है और कुल देवी-देवताओं की पूजा की परंपरा सदियों से चली आ रही है. मान्यता है कि कुलदेवी बाधाओं को दूर करती हैं और परिवार को सुरक्षित रखती हैं. अलग-अलग जाति के लोग अलग-अलग कुल देवी-देवताओं की पूजा करते हैं. उदाहरण के लिए हिंगलाज माता को चारण […]

Ranjeet Bhartiya 23/03/2023

नाई पारंपरिक रूप से बाल काटने के व्यवसाय में लगी एक हिंदू जाति है, जो भारत में व्यापक रूप से वितरित है. बाल काटने के अलावा जन्म, विवाह, मृत्यु और धार्मिक संस्कारों में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. इसलिए नाई समाज के लोगों का सभी समुदायों और विभिन्न जातियों के साथ बेहद करीबी रिश्ता रहा […]

Ranjeet Bhartiya 22/03/2023

नाई भारत में निवास करने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू समुदाय है जिसका पारंपरिक व्यवसाय क्षौर कर्म (हजामत) करना रहा है. लेकिन हिंदू समाज में इनकी भूमिका केवल बाल काटने तक हीं सीमित नहीं है. सभी हिंदू संस्कारों चाहे वह मुंडन संस्कार हो या शादी विवाह या मृत्यु के पश्चात श्राद्ध कर्म तथा धार्मिक अनुष्ठानों में […]

Ranjeet Bhartiya 14/03/2023

नाई केश शिल्पियों का एक समुदाय है. प्राचीन काल से ही भारतीय सामाजिक व्यवस्था में इनका महत्वपूर्ण स्थान रहा है. बाल काटने के अपने पारंपरिक काम के अलावा धार्मिक अनुष्ठानों में पंडितों के सहायक के रूप में भी इस समुदाय के लोगों की भूमिका रही है. भारत के सभी राज्यों में इनकी मौजूदगी है और […]